मंगलवार, 14 मई 2013

365 साल का हुआ दिल्ली का लाल किला।

चित्र साभार : www.flickr.com
1639 ई . को मुग़ल बादशाह शाहजहाँ ने दिल्ली के शहर शाहजहाँबाद में लाल किले को बनवाना शुरू किया था।    जो नौ वर्षो के बाद 13 मई, 1648 ई . को बनकर तैयार हुआ था। 13 मई, 2013 को दिल्ली के इस लाल किले ने अपने स्थापना के 365 वर्ष पूरे किये हैं। दिल्ली का लाल किला दुनिया के सर्वाधिक प्रसिद्ध महलों में से एक रहा है। लाल किला का यह नाम इसलिए पड़ा क्योंकि यह लाल पत्थरों से निर्मित है। लाल किला मुगलकालीन वास्तुकला का एक नायाब उदारहण है।

वैसे भारत का इतिहास भी इस किले से काफी जुड़ा हुआ है। इसी किले से ब्रिटिश व्यापारियों ने अंतिम मुग़ल बादशाह बहादुरशाह जफ़र को पद से हटाकर लगभग तीन शताब्दियों से चले आ रहे मुग़ल शासन का अंत किया था। भारत की आजादी का भी लाल किला साक्षी रहा है। 15 अगस्त, 1947 को लाल किले से तिरंगा फहराते हुए भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु ने कहा था कि - "भारत अब उपनिवेशी राज्य से स्वतंत्र हो चुका है।" 

अन्य मुग़लकालीन इमारतों की तरह लाल किला भी अष्टभुजाकार है।लाल किले में प्रवेश करने के दो द्वार हैं लाहौरी गेट और दिल्ली गेट

लाल किले से जुड़े रोचक तथ्य :-

1- चीन से रेशम और तुर्की से मखमल लाकर लाल किले कि सजावट की गई थी।

2- लाल किला भारत की राजधानी नई दिल्ली से लगी पुरानी दिल्ली में स्थित है।

3 - लाल किला मुग़ल बादशाह शाहजहाँ की नई राजधानी शाहजहाँबाद का महल था। यह दिल्ली की सातवीं मुस्लिम नगरी थी।

4- लाल किले के निर्माण के बाद कई विकास कार्य मुग़ल बादशाह औरंगजेब एवं अंतिम मुग़ल शासकों द्वारा कराए गए हैं।

5- 11 मार्च, 1783 ई . में सिखों ने सरदार बघेल सिंह धालीवाल के नेतृत्व में लाल किले के दीवान-ए-आम पर कब्ज़ा कर लिया था।  दीवान-ए-आम लाल किले का सार्वजनिक प्रेक्षागृह है।

6- 1857 ई . के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद, लाल किले को ब्रिटिश सेना ने इसे अपना मुख्यालय बना लिया  था।

7- लाल किले को 2007 ई . में यूनेस्कों द्वारा विश्व धरोहर सूची  में शामिल किया गया था। 

बृहस्पतिवार, 18 अप्रैल 2013

विश्व विरासत दिवस (World Heritage Day)

चित्र साभार : www.punjabkesari.in 

एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन ने 1968 ई . में विश्व प्रसिद्ध इमारतों और प्राकृतिक स्थलों की रक्षा के लिए एक प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र के सामने 1972 ई . में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान ये प्रस्ताव पारित हुआ। इस तरह विश्व के लगभग सभी देशों ने मिलकर ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहरों को बचाने की शपथ ली। इस तरह "यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सेंटर" (UNESCO WORLD HERITAGE CENTER)  अस्तित्व में आया।  18 अप्रैल, 1978 ई . में पहली विश्व के कुल 12 स्थलों को  विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया। इस दिन को तब "विश्व स्मारक और पुरातत्व स्थल दिवस" के रूप में मनाया जाता था। लेकिन यूनेस्को ने वर्ष 1983 ई . से इस दिवस को "विश्व विरासत दिवस" के रूप में बदल दिया। आज पूरे विश्व में कुल 911 विश्व विरासत स्थल हैं। जिनमे 704 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक, 180 प्राकृतिक और 27 मिश्रित स्थल हैं। (दिसम्बर 2011 तक)   

1983 ई . में पहली बार भारत के चार ऐतिहासिक स्थलों को यूनेस्को ने "विश्व विरासत सूची" में शामिल किया था। ये चार स्थल थे :- ताजमहल, आगरा फोर्ट, अजंता और एलोरा की गुफाएँ। आज पूरे भारत में कुल 28 विश्व विरासत हैं, जो भारत के कुल 15 राज्यों में स्थित हैं।मैं यहाँ पर भारत के विश्व विरासतों के नाम पेश कर रहा हूँ, उम्मीद है आपको पसंद आएगा।

स्थल - राज्य - विश्व विरासत सूची में शामिल होने का वर्ष 

ताजमहल - उत्तर प्रदेश - 1983
आगरा फोर्ट - उत्तर प्रदेश - 1983
अजंता की गुफाएँ - महाराष्ट्र - 1983
एलोरा की गुफाएँ - महाराष्ट्र - 1983
महाबलीपुरम के स्मारक - तमिलनाडु -1984
कोणार्क का सूर्य मंदिर - उड़ीसा - 1984
केवलादेव नेशनल पार्क - राजस्थान -1985 
काजीरंगा नेशनल पार्क - असम - 1985
मानस वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी - असम - 1985
फतेहपुर सीकरी - उत्तर प्रदेश - 1986
खजुराहों के मंदिर - मध्य प्रदेश - 1986
चर्च एवं कान्वेंट - गोवा - 1986
हंपी के स्मारक - कर्नाटक - 1986
एलिफेंटा की गुफाएँ - महाराष्ट्र - 1987
सुंदरवन नेशनल पार्क - पश्चिम बंगाल - 1987
पट्टाडकल के मंदिर - कर्नाटक - 1987
नंदा देवी नेशनल पार्क - उत्तराखंड - 1988
साँची का स्तूप - मध्य प्रदेश - 1989
हुमायूँ का मकबरा - दिल्ली - 1993
क़ुतुब मीनार - दिल्ली - 1993
बोधगया का महाबोधि मंदिर - बिहार - 2002
भीमबेटका के रॉक शैल्टर - मध्य प्रदेश - 2003
चंपानेर-पावागढ़ राष्ट्रीय उद्यान - गुजरात - 2004
मुंबई का क्षत्रपति शिवाजी टर्मिनस - महाराष्ट्र - 2004
चोल मंदिर - तमिलनाडु - 2004
लाल किला - दिल्ली - 2007
जयपुर का जंतर-मंतर - राजस्थान - 2010
माउंटेन रेलवे
(दार्जिलिंग-हिमालयन रेलवे) - पश्चिम बंगाल - 1999
(नीलगिरी माउंटेन रेलवे) - तमिलनाडु - 2005
(कालका-शिमला रेलवे) - हिमाचल प्रदेश - 2008                                                             

रविवार, 14 अप्रैल 2013

श्रद्धांजलि : अब्राहम लिंकन


अब्राहम लिंकन का जन्म 12 फरवरी, 1809 ई . को केंटकी (संयुक्त राज्य अमेरिका) में हुआ था। लिंकन अमेरिका के राष्ट्रपति बनने से पहले एक सफल वकील थे। लिंकन रिपब्लिकन पार्टी से थे, वे पहले नेता थे जो रिपब्लिकन पार्टी से अमेरिका के राष्ट्रपति बने थे। अब्राहम लिंकन अमेरिका के 16वें राष्ट्रपति थे। उनका राष्ट्रपति कार्यकाल 1861 से लेकर 1865 ई . तक था। लिंकन ने अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान अमेरिकी गृहयुद्ध और दास प्रथा का अंत किया था। वे अमेरिका के सबसे सफल राष्ट्रपति के तौर पर देखे जाते हैं।14 अप्रैल, 1865 ई . में एक नाटक देखने के दौरान एक व्यक्ति द्वारा लिंकन की हत्या कर दी गई थी। 

आज हम सब उनकी 148वीं पुण्यतिथि पर उनको श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

शुक्रवार, 22 मार्च 2013

विश्व जल दिवस (World Water Day)

आज विश्व जल दिवस है इस दिवस को मनाने की पहली अंतर्राष्ट्रीय पहल सन 1992 ई . में  ब्राजील की राजधानी "रियो डी जेनेरियो" में आयोजित "पर्यावरण तथा विकास का संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन" (UNCED) में की गई थी। जिसके परिणाम स्वरूप अगले वर्ष यानि सन 1993 ई .में पहली बार 22 मार्च के दिन पूरे विश्व में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य किया गया इसलिए प्रतिवर्ष 22 मार्च को पूरे विश्व में जल दिवस के रूप में मनाया जाता है। जल दिवस मनाने का प्रमुख उद्देश्य यह है की विश्व के सभी देश जल के संरक्षण और उसके रख-रखाव के बारे में ठोस कदम उठाये।

जल से जुड़े विश्व भर के कुछ रोचक तथ्य :-

1-) एक व्यक्ति अपने पूरे जीवनकाल में लगभग 60,000 लीटर पानी पी जाता है।
2-)  हमारे देश के सारे अखबारों को एक दिन की छपाई के लिए लगभग 2,000 लाख गैलन पानी की ज़रूरत होती है।
3-) एक किलोवाट जल विध्दुत के लिए 400 गैलन पानी की आवश्यकता होती है।
4-) दूषित पानी पीने से दुनिया भर में हर साल लगभग 22 लाख लोग मरते हैं।
5-)  एक व्यक्ति बिना भोजन किये 2 महीने जीवित रह सकता है लेकिन पानी पिये बगैर मुश्किल से एक हफ्ता ही जीवित रह सकता है।
6-) दुनिया भर में प्रति 10 व्यक्तियों में से 2 व्यक्तियों को पीने का शुद्ध पानी भी नहीं मिलता है।
7-) हमारी पृथ्वी का लगभग 71 % हिस्सा जल से भरा है, जो कुल एक अरब 40 घन किलो लीटर पानी के रूप में है। लेकिन इसमें से 97.3 % पानी समुद्र में है, बाकि शेष 2.7 % पानी नदियों, तालाबों और कुँओं में है।

जल संरक्षण के कुछ उपाय :-

1-) घरों में पानी की जितनी आवश्यकता हो उतना ही पानी घर में रखे।
2-) नल से होने वाले पानी के रिसाव को रोके।
3-) वर्षा के जल का संरक्षण करें और उन्हें प्रयोग में लाये।
4-) पानी का दुरूपयोग ना करें। जितनी आवश्यकता हो उतना ही इस्तेमाल करें।
5-) नदियों और तालाबों को स्वच्छ रखे और दूसरे लोगों से भी ये अपील करें।
6-) केंद्र और राज्य सरकार मिलकर जल संरक्षण पर विशेष ध्यान दे।

हमें जल के संरक्षण और उसकी साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए क्योंकि "जल" है तभी तो आपका और हमारा "कल" है। जल ही जीवन है और हमारे जीवन का अमूल्य धन है। वैसे भी कहा जाता है कि अगर दुनिया में तीसरा विश्व युद्ध होगा तो वो इसी जल के लिए ही होगा। 

बृहस्पतिवार, 21 मार्च 2013

विश्व वानिकी दिवस

                                                                       (चित्र साभार : www.facebook.com)  

आज विश्व वानिकी दिवस है यह दिवस प्रतिवर्ष 21 मार्च को मनाया जाता है। पहला विश्व वानिकी दिवस सन 1971 ई . में मनाया गया था। विश्व वानिकी दिवस इस उद्देश्य से मनाया जाता है कि विश्व के सभी देश अपनी वन-सम्पदा की तरफ ध्यान दें और वनों को संरक्षण प्रदान करे। हमारे देश भारत में भी वन-सम्पदा पर्याप्त रूप से है। भारत में 657.6 लाख हेक्टेयर भूमि (22.7 %) पर वन पाए जाते हैं। जबकि एक नए अनुमान के अनुसार वर्तमान समय में भारत 19.39 % भूमि पर वनों का विस्तार है और छत्तीसगढ़ राज्य में सबसे ज्यादा वन-सम्पदा है उसके बाद क्रमश : मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश राज्य में। भारत सरकार द्वारा सन  1952 ई . में निर्धारित "राष्ट्रीय वन नीति" के तहत हमारे देश के 33.3 % क्षेत्र पर वन होने चाहिए। लेकिन वर्तमान समय में ऐसा है नहीं धीरे-धीरे हमारे वन नष्ट होते जा रहें है। वन-भूमि पर उद्योग-धंधो तथा मकानों का निर्माण, वनों को खेती के काम में लाना और लकड़ियों की बढती माँग के कारण वनों की अवैध कटाई आदि वनों के नष्ट होने के प्रमुख कारण है। इसलिए अब समय आ गया है कि हम अपने देश की "राष्ट्रीय निधि" को बचाए और इनका संरक्षण करे। हमें वृक्षारोपण(पेड़-पौधे लगाना) को बढ़ावा देना चाहिए। इसके सम्बन्ध में प्रसिद्ध पर्यावरणविद डॉ . कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी ने कहा था कि -"वृक्षों का अर्थ है जल, जल का अर्थ है रोटी और रोटी ही जीवन है।"


हमें बेकार पड़ी भूमि पर वृक्ष लगाने चाहिए। सड़क, रेलमार्ग और नदियों के किनारे वृक्ष लगाने चाहिए। शहरों और गाँवों में भी पर्याप्त मात्रा में पेड़-पौधे लगाने चाहिए। सरकार को भी वनों की अवैध कटाई पर रोक लगानी चाहिए।

शुक्रवार, 1 मार्च 2013

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर विशेष : रमन प्रभाव।

"रमन प्रभाव" को डॉ . चन्द्रशेखर वेंकटरमन की सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिक खोज माना जाता है। इसका सूत्रपात 1921 में रमन की विदेश यात्रा से ही शुरू हुआ था। समुद्र के गहरे नीले पानी ने इनका ध्यान आकर्षित किया जिसके बाद पानी, हवा, बर्फ आदि पारदर्शक माध्यमों के अणुओं द्वारा परिक्षिप्त होने वाले प्रकाश का इन्होंने अध्ययन किया। इस सिद्धांत के द्वारा ही रमन ने बताया कि प्रकाश का रंग परिक्षेपण द्वारा बदल जाता है। प्रकाश प्रकीर्णन के अध्ययन के परिणाम से ही 28 फरवरी, 1928 को एक नई खोज का जन्म हुआ। जो दुनिया भर में "रमन प्रभाव" के नाम से विख्यात हुई। इस खोज के लिए डॉ . चन्द्रशेखर वेंकटरमन को वर्ष 1930 में भौतिकी के लिए नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ। उनकी इसी ऐतिहासिक खोज के कारण ही भारत में प्रतिवर्ष 28 फरवरी को "राष्ट्रीय विज्ञान दिवस" के रूप में मनाया जाता है।

रविवार, 24 फरवरी 2013

पुण्यतिथि : पं . अमृतलाल नागर

                                                  (चित्र साभार : http://bharatdiscovery.org)

अमृतलाल जी का जन्म 17 अगस्त, 1916 को मध्यम वर्ग के एक सम्मानित गुजराती ब्राह्मण परिवार में आगरा के गोकुलपुरा में हुआ था। इनके पितामह का नाम  पं . शिवराम नागर था जो सन 1895 में लखनऊ जाकर बस गए थे। इनके पिता का नाम पं . राजाराम नागर था। सन 1895 में जब अमृतलाल जी केवल 19 वर्ष के थे, तभी इनके पिताजी का आकस्मिक निधन हो गया तथा परिवार का बोझ इनके युवा कंधों पर आ गया। इसी वजह से इन्हें हाईस्कूल के बाद अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी।

अमृतलाल जी ने परिवार का खर्च चलाने के लिए एक बीमा कंपनी में 30 रूपये मासिक वेतन पर नौकरी कर ली, लेकिन कुछ ही समय बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी। इसके बाद सन 1940 में अमृतलाल जी सिनेमा जगत में नाम कमाने के उद्देश्य से बम्बई (मुंबई) गए। बम्बई में 7 वर्ष के दौरान अमृतलाल जी ने खूब नाम कमाया। वहाँ 7 वर्ष रहकर अमृतलाल जी वापस लखनऊ आ गए तथा जीवन भर यही रहकर साहित्य-साधना करने लगे। अमृतलाल जी हिंदी जगत के प्रसिद्ध उपन्यासकार थे, इनके प्रसिद्ध उपन्यास हैं :- महाकाल (1947), सेठ बांकेमल (1955), बूँद और समुद्र (1956), शतरंज के मोहरे (1959), सुहाग के नूपुर (1960), अमृत और विष (1966). सात घूँघटवाला मुखड़ा (1968), मानस का हंस (1972) आदि। अमृतलाल नागर जी ने हिंदी जगत में उपन्यासकार, नाटककार, निबंधकार और कहानीकार के रूप में बहुमूल्य योगदान दिया।

अमृतलाल जी को हिंदी जगत में बहुमूल्य योगदान के लिए अनेक सम्मान एवं पुरस्कार भी प्राप्त हुए। "बूँद और समुद्र" के लिए काशी नागरी प्रचारिणी सभा का बटुक प्रसाद पुरस्कार और सुधाकर रजत पदक, "सुहाग के नूपुर" के लिए उत्तर प्रदेश सरकार का प्रेमचंद पुरस्कार, "अमृत और विष" के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार (1967), सोवियत लैंड पुरस्कार (1970)भारत सरकार द्वारा वर्ष 1981 में "पदमभूषण" तथा वर्ष 1986 में बिहार सरकार द्वारा एक लाख रुपये के डॉ . राजेन्द्र प्रसाद शिखर सम्मान से भी अमृतलाल नागर जी को सम्मानित किया गया।

हिंदी साहित्य जगत में लगभग 60 वर्षों की दीर्घकालीन सेवा करने के बाद 23 फरवरी, 1990 को लखनऊ के किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज में अमृतलाल नागर जी का 73 वर्ष की आयु में निधन हो गया। हम सब उनकी 23वीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।   

बृहस्पतिवार, 21 फरवरी 2013

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर विशेष लेख : भारत की प्रमुख भाषाएँ।


आज अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस है। यह दिवस प्रत्येक वर्ष 21 फरवरी को मनाया जाता है। पहला अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 21 फरवरी, 2000 को मनाया गया था। यूनेस्को द्वारा नवंबर, 1999 को इस उद्देश्य से इस दिवस की घोषणा हुई थी कि ताकि हर कोई अपनी मातृभाषा का आदर करे तथा वे भाषाएँ जो विलुप्ति के कगार पर हैं उनको बचाने के लिए प्रयत्न किया जा सकें।

आज अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस है तो इस अवसर पर मैं आज भारत की प्रमुख भाषाओं का इतिहास आप सबके सामने प्रस्तुत करने की कोशिश करूँगा। प्राचीन भारत में पाली, प्राकृत, मागधी, शूरसेनी (शौरसेनी), संस्कृत तथा द्रविड़ (तेलुगू, तमिल, कन्नड़ आदि) भाषाओं का विकास हुआ। आर्यों की भी प्रमुख भाषा "संस्कृत" रही, जबकि दक्षिण भारतीयों ने द्रविड़ भाषाओं का प्रयोग किया। प्राचीन काल में भारतीयों ने ब्राह्मी और खरोष्ठी लिपियों का उपयोग किया। इन्हीं लिपियों में पुराने समय के स्तम्भ-लेख, शिला-लेख, तामपत्र तथा प्रशस्ति-लेख आदि लिखे गए। मध्यकाल में भारत में अरबी, तुर्की और फारसी भाषाओं का प्रचलन शुरू हुआ तथा इसी दौर में हिंदी (खड़ी बोली) भाषा भी विकसित हुई। हिंदी और फारसी के मेल से ही उर्दू नामक एक नई लोकप्रिय भाषा बन गई। दो शताब्दी पहले ही भारत में अंग्रेजी (English) भाषा का विकास हुआ। लार्ड मैकाले ने इसी आधार पर सन 1835 में भारत में अंग्रेजी शिक्षा की नींव डाली।

इन भाषाओं के साथ-साथ भारत में प्रान्तीय भाषाओं (पंजाबी, सिंधी, बंगाली, हरियाणवी, मैथिली, राजस्थानी, गुजराती, मराठी, असमिया, उड़िया आदि) का भी पर्याप्त रूप से विकास हुआ है। वर्तमान में भारत की राष्ट्रभाषा "हिंदी" है। भारतीय संविधान में 22 प्रान्तीय भाषाओं को भी मान्यता दी गई है। आजकल सरकारी कामकाज में देवनागरी लिपि को प्राथमिकता दी जा रही है। 

शुक्रवार, 8 फरवरी 2013

जन्म दिवस : डॉ. जाकिर हुसैन


आज हमारे देश के विश्वविख्यात नेता तथा शिक्षाशास्त्री डॉ . जाकिर हुसैन जी का 116 वां जन्म दिवस है। ये भारत के तीसरे राष्ट्रपति थे। जाकिर जी का जन्म 8 फरवरी, 1897 को हैदराबाद (आंध्र प्रदेश) में एक पठान परिवार में हुआ था। कुछ समय बाद इनका परिवार उत्तर प्रदेश रहने आ गया था। जाकिर जी बहुत बुद्धिमान और प्रतिभावान छात्र थे इन्होंने इटावा (उत्तर प्रदेश) से हाई स्कूल की परीक्षा पास करके, उच्च शिक्षा के लिए अलीगढ़ विश्वविद्यालय गए जहाँ से इन्होंने एम.ए. की परीक्षा पास करी। महात्मा गाँधी से प्रभावित होकर इन्होंने अपना जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया। 1920 में इनके अथक प्रयासों से ही दिल्ली में "जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय" की स्थापना हुई। जर्मनी में "बर्लिन विश्वविद्यालय" से इन्होंने अर्थशास्त्र में गहन अध्ययन करके वर्ष 1926 में पी.एच.डी. की डिग्री प्राप्त करी।

भारत के स्वतंत्रता के बाद डॉ. जाकिर हुसैन 1948 से 1956 तक यानि 8 वर्ष "अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय" के उपकुलपति रहे। डॉ. जाकिर हुसैन का पूरा जीवन शिक्षा को ही समर्पित था। 1956 से 1958 तक डॉ. जाकिर हुसैन "संयुक्त राष्ट्र के अभिकरण-शिक्षा, विज्ञान और सांस्कृतिक संगठन (U.N.E.S.C.O)" के सदस्य रहे। ये बिहार के राज्यपाल भी रहे। 13 मई, 1962 को डॉ . जाकिर हुसैन भारत के दूसरे उपराष्ट्रपति निर्वाचित हुए। वर्ष 1963 में भारत सरकार द्वारा डॉ . जाकिर हुसैन को उनकी विशेष उपलब्धियों और अभूतपूर्व कार्यों के लिए "भारत रत्न" से सम्मानित किया गया। 13 मई, 1967 देश के लिए गौरवशाली दिन था, जब डॉ. जाकिर हुसैन भारत के तीसरे राष्ट्रपति निर्वाचित हुए। 3 मई, 1969 को दिल का दौरा पड़ने से डॉ . जाकिर हुसैन का दुर्भाग्यपूर्ण निधन हो गया। ये दुर्भाग्य की बात है कि देश का इतना योग्य व्यक्ति अपने राष्ट्रपति कार्यकाल को पूरा ना कर सका।

भारत सरकार द्वारा "डॉ . जाकिर हुसैन" पर जारी किए गए दो विशेष डाक-टिकटों की तस्वीर :-

                              

शनिवार, 2 फरवरी 2013

चीन की महान दीवार (The Great Wall of China)


चीन की महान दीवार दुनिया के सात आश्चर्यों में से एक है। इस विशाल दीवार को यूनेस्को द्वारा वर्ष 1987 में विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था। इस दीवार का निर्माण चिन वंश ( 225 ईसा पूर्व - 202 ईसा पूर्व ) के प्रतापी और महान सम्राट शी हुआंग टी ( Shi Huang Ti ) ने करवाया था। गौरतलब है कि चिन वंश के नाम पर ही पूरे देश का नाम " चीन " पड़ा था। शी हुआंग टी ने ( 221 ईसा पूर्व से 210 ईसा पूर्व ) तक चीन पर शासन किया था। कुछ इतिहासकारों के मतानुसार वह एक लौह पुरुष और स्वभाव से कठोर व्यक्ति था। उसने चीन की उत्तर - पश्चिम सीमा पर हूणों के आक्रमण से देश की सुरक्षा के लिए एक विशाल दीवार का निर्माण करवाया था। उसने इस दीवार पर लिखवाया था कि - " स्वर्ग के नीचे यह सबसे बड़ी सैनिक रोक है। "

एक जानकारी " चीन की महान दीवार " के बारे में :-


चीन की महान दीवार लगभग 2,900 किलोमीटर लंबी, 20 फुट चौड़ी तथा 22 फुट ऊँची है। इसमें 20 हज़ार गुम्बदें, 23 हजार स्तम्भ और 10 हजार सुरक्षा चौकियाँ बनी हुई हैं। प्रत्येक 100 गज के बाद 40 फुट चौड़ा बुर्ज बनाया गया है। ये दीवार चीन के पूर्व में समुद्र से शुरू होकर चीन की उत्तर - पश्चिम सीमाओं से होती हुई तिब्बत पर जाकर समाप्त होती है।