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Tuesday, July 29, 2014

जे. आर. डी. टाटा

जे. आर. डी. टाटा 
महान उद्योगपति श्री जे. आर. डी. टाटा जी का पूरा नाम जहाँगीर  रतन जी दादाभाई टाटा है। उनका जन्म 29 जुलाई, 1904 ई. को पेरिस में हुआ था। इनके पिता रतन जी दादाभाई टाटा पेरिस में निर्यात का कारोबार करते थे। इनकी माँ सुजैन फ्रांसीसी थी। जहाँगीर की स्कूली शिक्षा बम्बई के कैथेड्रल स्कूल में हुई। वह अपनी छुट्टियाँ पेरिस में माता - पिता के साथ बिताते थे। प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान उन्होंने दो वर्ष जापान के याकोहामा में बिताए थे। स्कूली शिक्षा समाप्त करने के बाद जहाँगीर अपने माता - पिता के पास फ्रांस लौट गए। फ्रांस में उन्हें अनिवार्य फौजी सेवा के लिए फ़ौज में भर्ती कर लिया गया। 1924 उन्होंने  फ्रांसीसी घुड़सवार रेजीमेंट के साथ अल्जीरिया में बिताया।

उन्हीं दिनों जहाँगीर के पिता श्री रतन जी अपने पुत्र को उच्च शिक्षा के लिए कैम्ब्रिज भेजने की सोच रहे थे, किंतु उन्होंने उसे टाटा इस्पात कारखाने के महाप्रबन्धक जॉन पीटरसन का सहायक बनाने का फैसला किया।

श्री जे. आर. डी. टाटा को सन् 1926 में अपने पिता रतन जी दादाभाई टाटा जी की मृत्यु के बाद टाटा एण्ड सन्स में निदेशक बनाया गया। इससे पहले जे. आर. डी. टाटा ने 15 वर्ष की उम्र में विमान चालक बनने का फैसला किया था। सन् 1929 ई. में कमर्शियल लाइसेंस पाने वाले वह पहले भारतीय पायलट थे। तीस के दशक में उन्होंने टाटा एयरलाइन्स ( TATA Airlines ) शुरू की। अक्टूबर 1932 में एक इंजन वाले पाइपर विमान से उन्होंने करांची और बम्बई बीच पहली व्यापारिक उड़ान भरी। इसी विमान सेवा ने कालान्तर एयर इंडिया ( Air India ) का रूप ले लिया है।

टाटा उद्योग समूह के प्रमुख सर नौरोजी सकालटवाला के निधन के बाद सन् 1932 में जे. आर. डी. टाटा को टाटा उद्योग समूह ( TATA Industtrial Group ) का अध्यक्ष बनाया गया। उन्होंने चार दशक से भी अधिक समय तक टाटा समूह नेतृत्व किया और फिर अपेक्षाकृत युवा रतन टाटा ( Ratan Tata ) को नेतृत्व सौंप दिया।

जे. आर. डी. टाटा के नेतृत्व में टाटा उद्योग समूह ने रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग, ट्यूब, वोल्टाज , टाटा सर्विसेज, निर्यात, टाटा इंड्रस्टीज लिमिटेड आदि अनेक कंपनियाँ शुरू की। इसके अलावा उन्होंने मलेशिया और सिंगापुर में भी कंपनियाँ स्थापित कीं।

जे. आर. डी. टाटा जी को अनेकानेक उपलब्धियाँ प्राप्त रही हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा में वह सन् 1948 में भारत के प्रतिनिधि के रूप में थे। सन् 1974 में उन्हें IAF द्वारा सम्मानित एयर वाइस मार्शल घोषित किया गया। सन् 1954 में फ्रांस ने उन्हें अपने देश का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार "लीजन ऑफ़ द ऑनर" से नवाजा। भारत सरकार ने उन्हें सन् 1957 में देश का दूसरा सर्वोच्च पुरस्कार "पद्म विभूषण" से सम्मानित किया। इसके अलावा जे. आर. डी. टाटा जी को दुर्गाप्रसाद खेतान स्मारक स्वर्णपदक - 1970, अगस्त पुरस्कार - 1978 तथा टॉनीजेन्स पुरस्कार - 1979, रैंक ऑफ़ कमांडर ऑफ़ लीजन ऑफ़ ऑनर - 1983

भारत के तीन सुप्रसिद्ध विश्वविद्यालयों द्वारा उन्हें अपनी मानद उपाधियों से विभूषित किया गया -

D.Sc - इलाहबाद विश्वविद्यालय, उ. प्र. - 1947
D.Sc - बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, उ. प्र. - 1947
L.L.D. - बम्बई विश्वविद्यालय, महाराष्ट्र - 1981

सन्  1992 ई. को जे. आर. डी. टाटा जी को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान "भारत रत्न" से विभूषित किया गया।

जे. आर. डी. टाटा जी का 89 वर्ष की आयु में 29 नवम्बर, 1993 में जेनेवा, स्विट्ज़रलैंड में निधन हो गया। उनकी मृत्यु पर भारतीय संसद ने अपनी कार्यवाही स्थगित थी। यह एक ऐसा सम्मान है जो आमतौर पर सांसदों को ही प्राप्त होता है। मरणोपरांत जे. आर. डी. टाटा जी को उनकी जन्मभूमि पेरिस में ही दफनाया गया।


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