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Wednesday, September 17, 2014

किसने दिया था जय हिन्द का नारा ?

स्वतन्त्रता आन्दोलन के क्रान्तिकारी नेता सुभाष चन्द्र बोस ने अंग्रेजों के विरुद्ध नवम्बर 1941 ई. में एक सैनिक संगठन का गठन किया था, जिसे आजाद हिन्द फौज का नाम दिया गया। कई देशभक्त नवयुवक इस संगठन में भर्ती हुए। इस सेना का प्रमुख नारा था - जय हिन्द और दिल्ली चलो। 
चम्पक रमण पिल्लई 
कई लोगों की धारणा है कि "जय हिन्द" नारे के प्रणेता नेताजी सुभाष चन्द्र बोस थे, परन्तु ऐसा नहीं है। इस नारे के प्रणेता स्वतन्त्रता सेनानी चम्पक रमण पिल्लई थे, जिनका जन्म 15 सितम्बर, 1891 ई. में तिरुवनन्तपुरम (केरल) में हुआ था। अपने कॉलेज के छात्र - जीवन में ही पिल्लई ने इस नारे का उद्घोष किया था. अंग्रेजों के विरुद्ध होने वाले सत्याग्रह में भी पिल्लई ने भाग लिया था, अनेक बार जेल भी गये। 
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस 
नवम्बर, 1933 ई. में चम्पक रमण पिल्लई ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस से मिले थे। तब उन्होंने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का अभिवादन "जय हिन्द" से किया था। इस उद्घोष से नेताजी सुभाष चन्द्र बोस इतने प्रभावित हुए कि आगे चलकर उन्होंने इसे अपनी सेना का नारा स्वीकार किया। उस समय यह तय किया गया कि जब आजाद हिन्द फौज के सिपाही एक दूसरे से मिलें , तो जय हिन्द शब्द से सम्बोधित करें। 

यह भी निर्विवाद सत्य है कि इस नारे के प्रणेता कोई तत्कालीन कांग्रेस का नेता भी नहीं था। सन 1946 ई. में जब देश में अन्तरिम सरकार की स्थापना हुई, तब तत्कालीन प्रधानमन्त्री पण्डित जवाहर लाल नेहरु 
ने इस नारे को स्वीकार किया। 15 अगस्त, 1947 ई. को जब भारत को आजादी मिली, तो पंडित नेहरु ने लाल किले पर तिरंगा फहराने के पश्चात "जय हिन्द" शब्द का उद्घोष किया। इसके उपरान्त आगे भी जब वे अपना भाषण मंच से देते, तो उसकी समाप्ति पर "जय हिन्द" का नारा श्रोताओं से लगवाते। 


31 दिसम्बर, 1947 ई. के दिन डाक टिकट पर भी जय हिन्द की मुहर लगायी गयी. इस प्रकार 15 अगस्त व 26 जनवरी को उद्घोषित होने वाले नारे "जय हिन्द" के प्रणेता चम्पक रमण पिल्लई थे।     


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